दिल्ली में बाढ़ का कहर, दिल्ली हुई त्रस्त, रिकॉर्ड टूटने की कगार पर

Pankaj Choudhry
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दिल्ली में बाढ़ का कहर, दिल्ली हुई त्रस्त, रिकॉर्ड टूटने की कगार पर

हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी ने बढ़ाया यमुना का जल स्तर

देश की राजधानी दिल्ली के वाशिंदों के लिए गुरुवार की सुबह एक बेहद बुरी खबर लेकर आई हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज का छोड़ा गया पानी बहुत तेजी के साथ दिल्ली तक पहुंचा और पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना नदी का जल स्तर 208.48 मीटर पर पहुंच गया 

इससे आस पास की सड़कें सरकारी और प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में डूब गए नदी के पास रहने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा पुराने रेलवे पुल पर जल स्तर बुधवार रात 208 मीटर के निशान को पार कर गया था और गुरुवार सुबह 8 बजे तक बढ़कर 208.48 मीटर पर पहुंच गया

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक इसके और वृद्धि होना सामान्य बात है। 

उसमें इसे भीषण स्थिति करार दिया है ऐसे में सवाल यह है कि क्या दिल्ली की बाढ़ अब अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ देगी जब 1978 में देश की राजधानी बाढ़ में डूब गई है 

हम 45 साल पहले कि जिस बाढ़ की बात कर रहे हैं वह सितंबर के महीने में आई थी यह वह समय था जब दिल्ली में 100 वर्षों बाद इतनी जोरदार बाढ़ आई थी आलम यह था कि शहर आपातकाल की स्थिति में था टेलीफोन लाइनें बंद था यमुना के ऊपर सभी पुल बंद कर दिए गए थे और बाढ़ ग्रस्त इलाकों में सेना तैनात कर दी गई थी बाढ़ के खतरे को देखते हुए दिल्ली के महारानी बाग न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जामिया मिलिया और ओखला समेत कई इलाकों में निवासियों को अधिक सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया

पानी में डूबे सड़क, पुल, मकान, सेना को मंगाया

उस वक्त भी बाढ़ की वजह वही थी जो आज है दिल्ली से 287 किलोमीटर दूर हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज से तब करीब सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था 

1978 में बाहरी दिल्ली की 40 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कृषि भूमि करीब 2 मीटर तक पानी में डूब गई थी बाढ़ ने खरीफ की फसल को पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया था 1978 की बाद में ढाई लाख लोग बेघर हुए थे और बीस लोगों की जान भी गई थी 

1978 में बाहरी दिल्ली की 40 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कृषि भूमि करीब 2 मीटर तक पानी में डूब गई थी बाढ़ ने खरीफ की फसल को पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया था 1978 की बाद में ढाई लाख लोग बेघर हुए थे और 20 लोगों की जान भी गई थी 

पुलों को बंद करना पड़ा टेलीफोन लाइनें ठप हो गई और आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना को बुलाना पड़ा सेना की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को बचाया गया और राहत सामग्री बांटी गई 

दिल्ली में बाढ़ का कहर, दिल्ली हुई त्रस्त, रिकॉर्ड टूटने की कगार पर  हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी ने बढ़ाया यमुना का जल स्तर देश की राजधानी दिल्ली के वाशिंदों के लिए गुरुवार की सुबह एक बेहद बुरी खबर लेकर आई हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज का छोड़ा गया पानी बहुत तेजी के साथ दिल्ली तक पहुंचा और पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना नदी का जल स्तर 208.48 मीटर पर पहुंच गया   इससे आस पास की सड़कें सरकारी और प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में डूब गए नदी के पास रहने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा पुराने रेलवे पुल पर जल स्तर बुधवार रात 208 मीटर के निशान को पार कर गया था और गुरुवार सुबह 8 बजे तक बढ़कर 208.48 मीटर पर पहुंच गया  केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक इसके और वृद्धि होना सामान्य बात है।  उसमें इसे भीषण स्थिति करार दिया है ऐसे में सवाल यह है कि क्या दिल्ली की बाढ़ अब अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ देगी जब 1978 में देश की राजधानी बाढ़ में डूब गई है   हम 45 साल पहले कि जिस बाढ़ की बात कर रहे हैं वह सितंबर के महीने में आई थी यह वह समय था जब दिल्ली में 100 वर्षों बाद इतनी जोरदार बाढ़ आई थी आलम यह था कि शहर आपातकाल की स्थिति में था टेलीफोन लाइनें बंद था यमुना के ऊपर सभी पुल बंद कर दिए गए थे और बाढ़ ग्रस्त इलाकों में सेना तैनात कर दी गई थी बाढ़ के खतरे को देखते हुए दिल्ली के महारानी बाग न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जामिया मिलिया और ओखला समेत कई इलाकों में निवासियों को अधिक सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया  पानी में डूबे सड़क, पुल, मकान, सेना को मंगाया उस वक्त भी बाढ़ की वजह वही थी जो आज है दिल्ली से 287 किलोमीटर दूर हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज से तब करीब सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था   1978 में बाहरी दिल्ली की 40 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कृषि भूमि करीब 2 मीटर तक पानी में डूब गई थी बाढ़ ने खरीफ की फसल को पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया था 1978 की बाद में ढाई लाख लोग बेघर हुए थे और बीस लोगों की जान भी गई थी   1978 में बाहरी दिल्ली की 40 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कृषि भूमि करीब 2 मीटर तक पानी में डूब गई थी बाढ़ ने खरीफ की फसल को पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया था 1978 की बाद में ढाई लाख लोग बेघर हुए थे और 20 लोगों की जान भी गई थी   पुलों को बंद करना पड़ा टेलीफोन लाइनें ठप हो गई और आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना को बुलाना पड़ा सेना की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को बचाया गया और राहत सामग्री बांटी गई   दिल्ली में बाढ़ का कहर, 45 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने को है 1978 में कैसी हुई थी स्थिति? 1978 में यमुना का पानी 207.49 मीटर तक बढ़ कर बाढ़ का कारण बना, और दिल्ली के लोगों को पलायन करना पड़ा। अब 45 वर्ष का पुराना रिकॉर्ड तोड़कर यमुना का जलस्तर बुधवार शाम को 6 बजे 207.81 मीटर तक पहुंच गया   दिल्ली की यमुना में इतना पानी आ चुका है कि यमुना का रिकोर्ड टूटते ही दिल्ली सरकार ने इमरजेंसी बैठक बुला ली है   देश की राजधानी में यमुना का वॉर्निंग लेवल यानी चेतावनी का स्तर 204.50 मीटर होता है और खतरे का स्तर 205.33 मीटर है   सितंबर में ज़्यादा, जुलाई में कम दिल्ली में अब तक 16.5 हजार लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया  दिल्ली में बड़ी बाढ़ 1924, 1977, 1978, 1988, 1995, 1998, 2010, 2013 में आई 1963 से 2010 तक बाद आंकड़ों से पता चला कि सितंबर में बाढ़ आने की आशंका ज्यादा बढ़ती है और जुलाई में घटती है लेकिन इस बार जुलाई में ही बाढ़ के हालात बन गए हैं

1978 में कैसी हुई थी स्थिति?

1978 में यमुना का पानी 207.49 मीटर तक बढ़ कर बाढ़ का कारण बना, और दिल्ली के लोगों को पलायन करना पड़ा।

अब 45 वर्ष का पुराना रिकॉर्ड तोड़कर यमुना का जलस्तर बुधवार शाम को 6 बजे 207.81 मीटर तक पहुंच गया 

दिल्ली की यमुना में इतना पानी आ चुका है कि यमुना का रिकोर्ड टूटते ही दिल्ली सरकार ने इमरजेंसी बैठक बुला ली है 

देश की राजधानी में यमुना का वॉर्निंग लेवल यानी चेतावनी का स्तर 204.50 मीटर होता है और खतरे का स्तर 205.33 मीटर है 

सितंबर में ज़्यादा, जुलाई में कम

दिल्ली में अब तक 16.5 हजार लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया 

दिल्ली में बड़ी बाढ़ 1924, 1977, 1978, 1988, 1995, 1998, 2010, 2013 में आई 1963 से 2010 तक बाद आंकड़ों से पता चला कि सितंबर में बाढ़ आने की आशंका ज्यादा बढ़ती है और जुलाई में घटती है लेकिन इस बार जुलाई में ही बाढ़ के हालात बन गए हैं


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