मणिपुर हिंसा: राहुल गांधी का दो महीने बाद दौरा, सियासत तेज

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मणिपुर हिंसा: राहुल गांधी का दो महीने बाद दौरा, सियासत तेज

 हिंसा के पीछे की वजह

नॉर्थ ईस्ट का खूबसूरत शहर मणिपुर पिछले दो महीने से हिंसा की आग में जल रहा है. इस हिंसा ने मणिपुर के इतिहास के पन्नों को कई निर्दोष लोगों के खून से रंग दिया है।
जिनके घर जला दिए गए, किसी की माँ का लाल छीन लिया गया, किसी की पत्नी की माँग का सिन्दूर उजाड़ दिया गया और निकम्मी सरकार सिर्फ तमाशा देखती रही, इतना ही नहीं जहाँ लोग अपनी जान गँवा रहे थे, वहीं दूसरी ओर राजनेता भी कुछ नहीं कर पा रहे थे इस पर भी सेंकें चुनावी रोटियां. खुद को रोक नहीं पाए और जहां विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था, वहीं अब राहुल गांधी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं.

राहुल गांधी के दो महीने बाद ही मणिपुर जाने पर राजनीति तेज हो गई है, ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि सोनिया गांधी की आंखों के तारे राहुल गांधी को दो महीने बाद ही मणिपुर की याद क्यों आई, लेकिन उससे पहले हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है? यह हिंसा

दरअसल, मणिपुर में हिंसा के पीछे जो वजह बताई गई है, वह है मैत्री समुदाय यानी मैत्री समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना और यह बात नागा समुदाय के लोगों को हजम नहीं हुई और उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया, उनका कहना है कि मणिपुर में मैं बहुसंख्यक समुदाय हूं। में आते हैं लेकिन उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है

जिसके बाद उन्होंने सरकार के फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे विरोध इतना बढ़ गया कि इसने भीषण हिंसा का रूप ले लिया. 

राहुल गांधी का दौरा और उसके निहितार्थ

हिंसा के बीच जब राहुल गांधी मणिपुर पहुंचे तो इस बार उनका रुख अलग था. उनके इस दौरे को जहां खूब वाहवाही मिली, वहीं बीजेपी ने उन पर आरोपों की बौछार कर दी. पूरे दौरे के दौरान उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ जिसमें राहुल गांधी कुछ कह रहे हैं या कुछ बोल ही नहीं रहे हैं और ऐसा पहला चमत्कार एक बार हुआ जब राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह और मोदी सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला.

इस दौरान मणिपुर में राहुल गांधी के खिलाफ नारे भी लगाए गए, लेकिन फिर भी राहुल के कानों तक बात नहीं पहुंची, क्योंकि जल्द ही देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में सभी पार्टियां किसी के भी पास जा सकती हैं अपनी शक्ति स्थापित करने की हद तक.

ऐसे में एक अटकलें यह भी लगाई जा रही है कि क्या राहुल गांधी का मणिपुर दौरा किसी राजनीतिक साजिश के कारण तो नहीं था, क्या राहुल गांधी सिर्फ सहानुभूति बटोरने के लिए ही मणिपुर नहीं पहुंचे थे, यानी कहीं न कहीं लोगों को यह भी लग रहा है कि शायद राहुल इसके पीछे गांधीजी का सत्ता का लालच भी छिपा हो सकता है. 

वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की सम्भावनाएँ

तेज होती हिंसा के बीच मणिपुर के सीएम की कुर्सी खतरे में पड़ गई थी और उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी, जिसके बाद हजारों समर्थक उनके इंफाल स्थित आवास के सामने जमा हो गए. एकत्र हुए और उन्होंने इस्तीफा फाड़ दिया, इस बीच ऐसी कई घटनाएं हुईं

जिन लोगों ने लोगों को भड़काने का काम किया, दो महीने की हिंसा के बीच इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी गईं, जिसके कारण लोग अपने परिवार के सदस्यों से बात नहीं कर पा रहे थे, न ही उन्हें पता चल सका कि उनके परिवार के सदस्य किस स्थिति में हैं। हिंसा के बीच वे किस हाल में हैं, लेकिन धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे हैं.

इंटरनेट सेवा अभी तक शुरू नहीं की गई है, दरअसल ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद शांति भंग न हो, इसके लिए इंटरनेट सेवा बंद करने की अवधि को 12 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. 10 जुलाई. दिया गया

ताजा स्थिति के मुताबिक, मंगलवार को मणिपुर के तोह जिले में भीड़ ने इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप पर हमला कर दिया और हथियार चुराने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे. इस दौरान भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई. फायरिंग की, जिसके जवाब में सेना को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें 27 साल के एक शख्स की जान चली गई.

मणिपुर में हिंसक अशांति के बीच एक अच्छी खबर की भी झलक है.. मणिपुर में अशांति के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 2 को खोल दिया गया है. वहीं कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों के लिए भी स्कूल दोबारा खोल दिए गए हैं। आइए आपको बताते हैं

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