मोदी फिर पहुचे सुप्रीम कोर्ट, बेशर्मी की सारी हदें की पार, शाह की खुली पोल

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मोदी फिर पहुचे सुप्रीम कोर्ट, बेशर्मी की सारी हदें की पार, शाह की खुली पोल

चोर की दाढ़ी में तिनका मतलब हद होती है कथित बेशर्मी की भी ऐसे कौन से राज छुपा कर बैठे है ईडी डायरेक्टर संजय मिश्रा जिसके बिना मोदी सरकार का काम नहीं चलेगा ।


हिंदुस्तान की इक ख़बर के अनुसार

ED DAIRECTOR के तीसरे कार्यकाल पर पूरी तरह से अड़ी केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका कि ईडी डायरेक्टर संजय मिश्रा का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए


अब आप इस हेडिंग से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि मोदी सरकार को कथित तौर पर कितना डर लगता है कि कहीं ईडी डायरेक्टर के पद से संजय मिश्रा को हटा ना दिया जाए


बार बार कार्यकाल को बढ़ाया जा रहा है 

पहला कार्यकाल दो हज़ार इक्कीस में बढ़ाया गया फिर दूसरा कार्यकाल दो हज़ार बाईस में बढ़ाया गया जबकि दो हज़ार बीस में कार्यकाल खत्म होने वाला था फिर भी ईडी डायरेक्टर के कार्यकाल को बार बार एक्सटेंड किया गया


सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को किया था बेइज्जत

जब इसी महीने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो ग्यारह जुलाई को जस्टिस ने केंद्र सरकार की खूब बेइज्जत किया और मोदी सरकार से सवाल किया कि आप बार बार एक ही ईडी डायरेक्टर यानी के संजय मिश्रा का कार्यकाल क्यों बड़वा रहे हो, क्या आपके पास कोई दूसरा काबिल अफसर नही है जिसको हायर किया जा सके 



तब मोदी के वकील ने दलील दी थी 


कहा था कि दरअसल कुछ विदेशी सेटलमेंट का काम चल रहा है उनको संजय मिश्रा देख रहे हैं इतनी दलीलें  दी गई ,खूब सफाई दी गई लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने एक न सुनी मोदी सरकार को कथित तौर पर बेइज्जत करते हुए नवंबर में जो कार्यकाल खत्म होने वाला था उसे इकतीस जुलाई यानी कि जो आने वाली इकतीस जुलाई है चार दिन बाद खत्म करने के आदेश पारित कर दिया मतलब कार्यकाल को घटाया गया और कहा गया कि जो भी करना है उसे जल्दी निपटा लो अब संजय मिश्रा ईडी डायरेक्टर के पद पर नवंबर तक नहीं सिर्फ इकतीस जुलाई तक काम करेंगे और जो भी आपने किया है यानी कि जिस तरीके से आपने बार बार दो हज़ार इक्कीस दो हज़ार बाईस में कार्यकाल बढ़ाया है वो अवैध है यानी ईडी के डायरेक्टर अवैध तौर पर काम कर रहें थे,


यह अपने आप में बहुत बड़ी टिप्पणी है 



जो कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से की गई थी ग्यारह जुलाई की सुनवाई में लेकिन ऐसा लगता है कि इन सब टिप्पणियों के बावजूद मोदी सरकार में किसी तरह की कोई कथित शरम नहीं बची है 31 जुलाई को चार दिन का समय बचा है तो फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अलावा तो कोई ऐसा इनके पास तरीका भी नहीं है कि ईडी डायरेक्टर का कार्यकाल बढ़ाया जा सके 


पहले भी याचिका सुन चुकी है कोर्ट 

पहले ही सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा चुकी है लेकिन आप देखिए कि कथित तौर पर कितनी बेशर्मी है कि एक बार फिर से याचिका को दाखिल कर दिया गया है 


इक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की मंजूरी दी है 

अगर सुनवाई में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ पहुँच गए तो यह देखना दिलचस्प होगा कि इन लोगों को और कितनी फटकार लगने वाली है क्योंकि जब पहले ही आपको फटकार लग चुकी है तो दोबारा फटकार नहीं लगेगी इस बात की क्या गारंटी है  कि दरअसल केंद्र सरकार ने संजय कुमार मिश्रा को तीसरा सेवा विस्तार दिया था जिसका कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है लेकिन

इसे अवैध बताते हुए इसी महीने ग्यारह तारीख को  court ने आदेश दिया था कि 31 जुलाई तक संजय मिश्रा का दफ्तर खाली करवा लिया जाए और साथ ही बार बार संजय मिश्रा के कार्यकाल को बड़ाने के लिए केंद्र सरकार को खूब फटकार लगाई थी

पद को छोड़ने और दफ़्तर खाली करने का समय नजदीक आया तो एक बार फिर से याचिका दाखिल कर दी गई है बाद में कह देंगे अभी तो सुनवाई चल रही अभी तो अपने पद पर काम कर सकते हैं तो आप देख सकते हैं कि किस तरीके से पेच भिड़ाए जा रहे हैं कि किसी न किसी तरीके से ईडी का डायरेक्टर का कार्यकाल खत्म ना हो और लगातार अपने पद पर कायम रहें इतनी फजीहत के बाद तो कोई ऐसा नहीं करता जैसा की यह सरकार अपने आप में पहली सरकार होगी जो कि इतनी बेइज्जत भी हुए विपक्ष ने भी लगातार टारगेट करते हुए लगातार इसी मुद्दे को टारगेट करते हुए मोदी सरकार को कैसे कथित तौर पर बेइज्जत किया लेकिन मोदी सरकार को  ऐसा लगता है कि किसी तरह की कोई शमी नहीं आ रही है  


जब विपक्ष ने मोदी सरकार पर कार्यकाल बड़ाने पर सवाल खड़े किए थे 


तो अमित शाह ने बड़ी बड़ी बातें की थी बड़ी बड़ी बातें करते हुए कहा था  


ईडी डायरेक्टर कौन है कौन नहीं है इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता और हम तो अपना काम करेंगे और सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है अब जब आप कहते हैं कि हमें कोई फरक नहीं पड़ता तो जबकि ईडी डायरेक्टर का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो कथित तौर पर डर किस बात का सता रहा है


बार बार याचिका दाखिल की जा रही है दूसरा शख्स क्यों नहीं हायर किया जा रहा है क्या आपके पास कोई काबिल अफसर नहीं है जिसको ईडी डायरेक्टर बनाया जा सके या फिर की संजय मिश्रा ऐसे राज छुपा कर बैठे हैं कि अगर वह अपने पद से हटा दिए गए तो दो हज़ार चौबिस चुनाव मोदी सरकार के लिए मुश्किल


होने वाला है क्योंकि अब जो यह याचिका दाखिल की गई है यह कई तरह के सवाल खड़े करती है फिलहाल मैं बता दूं कि जबसे खबर निकलकर सामने आई है विपक्ष और उसी के साथ पत्रकार भी लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और मोदी सरकार से सवाल कर रहे हैं इसी पर वरिष्ठ पत्रकार हैं प्रशांत टंडन वह क्या 


उनका बयान सुनें वो लिखते हैं कि बेशर्मी की हद है सुप्रीम कोर्ट ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा का एक्सटेंशन गैर कानूनी करार दे चुकी है और इकतीस जुलाई में उनका आखिरी दिन होगा मोदी सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए मिश्रा का कार्यकाल बनवाने संजय मिश्रा ईडी में ऐसा क्यों


उनका बयान सुनें वो लिखते हैं कि बेशर्मी की हद है सुप्रीम कोर्ट ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा का एक्सटेंशन गैर कानूनी करार दे चुकी है और इकतीस जुलाई  उनका आखिरी दिन होगा मोदी सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई मिश्रा का कार्यकाल बड़वाने संजय मिश्रा ईडी में ऐसा क्या कर रहें है 


जो दूसरा नहीं कर सकता सवाल यही है और यही सवाल बार बार रिपीट किया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट ने भी यही पूछा और पत्रकार भी यही पूछ रहे है की ऐसा कौन सा काम है जो कि ईडी डायरेक्टर संजय मिश्रा ही कर सकते हैं दूसरा नहीं कर सकता अब क्या है क्या नहीं है यह तो आने वाला वक्त बताएगा


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या होगा यह भी अपने आप में देखना दिलचस्प होगा आपको क्या लगता है कि आखिर क्यों कथित तौर पर फजीहत होने के बावजूद मोदी सरकार बार बार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच रही है


ईडी डायरेक्टर संजय मिश्रा के पास क्या कोई राज है या फिर कि इसके पीछे क्या वजह है इस पर आप क्या सोचते हैं इस पूरी खबर पर आप क्या

 सोचते हैं हमें कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे।








 

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