अदालत छोड़ कर चले गए चंद्रचूड़, मोदी सरकार ने CJI को कमेटी से बाहर किया

Barik news
0

 

अदालत छोड़ कर चले गए चंद्रचूड़, मोदी सरकार ने CJI को कमेटी से बाहर किया

नमस्कार दोस्तों नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनाव आयोग का अध्यक्ष चुनने वाली कमेटी से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को आउट कर दिया।


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ अदालत से बीच सुनवाई के बीच अचानक उठकर चले गए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि मुझे तुरंत कुछ कारणों से घर जाना होगा।


देश की राजनीति देश का लोकतंत्र बहुत तेजी से करवट ले रहा है एक राजा की मनमानी को चंद्रचूड़ नाम का एक अकेला आदमी रोकने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगाकर खड़ा हुआ है और वो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अब राजा की आंखों में खटक चुका है और इसीलिए अब CEC सिलेक्शन बिल के जरिए नरेंद्र मोदी उनके एक खास कैबिनेट मंत्री और नेता प्रतिपक्ष मिलकर इलेक्शन कमीशन की मुखिया को चुन लेंगे।


नरेंद्र मोदी सरकार ने इलेक्शन कमीशन का मुखिया चुनने वाली कमेटी से सीजेआई को बाहर कर दिया इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने राज्यसभा में बिल भी पेश कर दिया है बिल के पास होते ही सीजेआई को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा नरेंद्र मोदी सरकार का संसद में बहुमत है तो फिर हर मनमानी को कानून बना देने को मोदी सरकार ने अपना एक स्टाइल बना लिया है आजकल जो मोदी जी कहते हैं तो सोचते हैं चाहते हैं उसका कानून बना दिया जाता है।


किसी भी देश में तानाशाही की शुरुआत कुछ ऐसे ही होती है पहले सारे लोकतांत्रिक ढांचे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लो फिर जो चाहे वो करो कोई भी उंगली उठाने वाला नहीं होगा।


कोरिया के सनकी राजा ने भी बिल्कुल ऐसा ही किया अब कोरिया के लोगों को किम जोंग के आगे ताली बजाने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं वहां भी विपक्ष है लेकिन जीतता सिर्फ किम जोंग है इलेक्शन कमीशन का मुखिया अब मोदीजी नियुक्त करेंगे अब मोदीजी इलेक्शन कमीशन के मुखिया को यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को नौकरी देने वाले तीन लोगों के पैनल के अध्यक्ष होंगे मोदी जी की कृपा से इलेक्शन कमीशन का मुख्य नौकरी पाएगा तो सोच कर देखिए आप सोचेंगे तो समझ में आयेगा कि मोदी जी के अहसानों के नीचे दबा हुआ चुनाव आयोग का मुखिया क्या देश में फेयर चुनाव करवा पाएगा क्या सत्ता पक्ष की मनमानियों पर अंकुश लगा पायेगा।


नरेंद्र मोदी यह कानून तब लेकर के आए हैं जब देश में चुनाव होने जा रहे नरेंद्र मोदी यह कानून तब लेकर के आए हैं जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगी नरेंद्र मोदी यह कानून तब लेकर के आए हैं जब चुनाव आयोग ने कहा था कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सरकार के नियंत्रण से बाहर होनी चाहिए।


नरेंद्र मोदी यह बिल तब लेकर के आए हैं दोस्तों जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक चुनाव आयोग में शीर्ष नियुक्ति के लिए बनी कमेटी में प्रधानमंत्री लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस शामिल होने थे।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इलेक्शन कमीशन को कठपुतली की तरह नचाने वाली डोर नरेंद्र मोदी सरकार के हाथ से छूट जाती इसीलिए डरे हुए राजा ने क्या किया सुप्रीम कोर्ट के बात को ओवर रोल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की बात को खारिज करने के लिए नया बिल राज्यसभा में पेश कर दिया गया और इस बिल के जरिए  जस्टिस को कमेटी से आउट कर दिया गया तीन लोगों की कमेटी बनाई है इस कमेटी के मुखिया होंगे नरेंद्र मोदी एक कैबिनेट मंत्री होगा और एक नेता प्रतिपक्ष होगा यानी अगर नेता प्रतिपक्ष विरोध भी करेगा तो भी उसके विरोध का कोई मतलब नहीं होगा।


सीजेआई के आदेश के मुताबिक तीन लोग कमेटी में होते खुद सीजेआई, नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री इनके तय किए गए आदमी पर राष्ट्रपति मुहर लगाता उस स्थिति में अगर सीजेआई और नेता प्रतिपक्ष एक तरफ हो जाते तो मोदी अपनी पसंद का चुनाव आयुक्त नहीं बना सकते थे लेकिन अब मोदी रहेंगे अध्यक्ष, उनके मंत्री रहेंगे एक सदस्य और एक नेता प्रतिपक्ष होंगे इस है न कमाल की बात और ये कमाल की मनमानी बहुमत वाली सरकार संसद में खड़े होकर कर रही है और वो भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ


कांग्रेस एक चिट्ठी दिखा रही है जिसमें यह कहा गया है कि मोदी जी के गुरु लालकृष्ण आडवाणी खुद चाहते हैं कि चुनाव आयोग आयुक्त चुनने वाली कमेटी में सीजेआई रहे , नरेंद्र मोदी सरकार की नाक में सबसे ज्यादा नकेल सुप्रीम कोर्ट ने हो डाली हुई है और अब नरेंद्र मोदी सरकार हर कदम पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को हराने में लगे हुए इसमें थोड़ा सा दर्द नरेंद्र मोदी जी के मुंह से संसद में भी निकल गया मोदी जी बोले कि अदालतों में क्या क्या हो रहा है हम जानते है।


यह बताने की जरूरत नहीं है कि बहुमत के घमंड में चूर सरकार की तानाशाही और मनमानी से एक ही संस्था लड़ रही है और वो है सुप्रीम कोर्ट नाम की संस्था मीडिया ने गोदी होकर पैसे खाकर तलवे चाटकर सत्ता के आगे सरेंडर कर दिया कार्यपालिका में तो किसी की हिम्मत नरेंद्र मोदी सरकार के आगे कदम उठाने की भी नहीं है विधायिका खुद बीजेपी सरकारों के हाथों में दो ही लोग सत्य और न्याय की बात कर रहे एक न्यायपालिका से चंद्रचूड़ और दूसरा अघोषित चौथे खंभे मीडिया से डिजिटल मीडिया जब राज्यसभा से यह बिल पास हो जाएगा तो आप यह मान कर चलिए कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर चलने वाली संस्था बनकर रह जाएगी और उसके बाद फेयर चुनाव की बात केवल जुमला ही रह रहे सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिल्कुल ठीक था कि चुनाव आयोग का मुखिया चुनने में राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए कितने लोग ऐसा मानते हैं कि चुनाव आयोग का अध्यक्ष निष्पक्ष लोगों के जरिये नियुक्त कराया जाना चाहिए कृप्या अपना जवाब जरुर दें।





एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)